Wednesday, August 8, 2018

लोकतंत्र : अटल बिहारी वाजपेयी के अनमोल विचार


  1. हमारा लोकतंत्र संसार का सबसे बड़ा लोकतंत्र है. लोकतंत्र की परंपरा हमारे यहां बड़ी प्राचीन है.. चालीस साल से ऊपर का मेरा संसद का अनुभव कभी-कभी मुझे बहुत पीड़ित कर देता है. हम किधर जा रहे हैं?
  2. भारत के लोग जिस संविधान को आत्म समर्पित कर चुके हैं, उसे विकृत करने का अधिकार किसी को नहीं दिया जा सकता.
  3. लोकतंत्र बड़ा नाजुक पौधा है. लोकतंत्र को धीरे- धीरे विकसित करना होगा. केन्द्र को सबको साथ लेकर चलने की भावना से आगे बढ़ना होगा.
  4. अगर किसी को दल बदलना है, तो उसे जनता की नजर के सामने दल बदलना चाहिए. उसमें जनता का सामना करने का साहस होना चाहिए. हमारे लोकतंत्र को तभी शक्ति मिलेगी, जब हम दल बदलने वालों को जनता का सामना करने का साहस जुटाने की सलाह देंगे.
  5. हमें अपनी स्वाधीनता को अमर बनाना है, राष्ट्रीय अखंडता को अक्षुण्ण रखना है और विश्व में स्वाभिमान और सम्मान के साथ जीवित रहना है.
  6. लोकतंत्र वह व्यवस्था है, जिसमें बिना घृणा जगाए विरोध किया जा सकता है और बिना हिंसा का आश्रय लिए शासन बदला जा सकता है.
  7. राजनीति सर्वांग जीवन नहीं है. उसका एक पहलू है. यही शिक्षा हमने पाई है, यही संस्कार हमने पाए हैं.
  8. कोई भी दल हो, पूजा का कोई भी स्थान हो, उसको अपनी राजनीतिक गतिविधियां वहां नहीं चलानी चाहिए.
  9. राजनीति काजल की कोठरी है. जो इसमें जाता है, काला होकर ही निकलता है. ऐसी राजनीतिक व्यवस्था में ईमानदार होकर भी सक्रिय रहना, बेदाग छवि बनाए रखना, क्या कठिन नहीं हो गया है? 
  10. कर्सी की मुझे कोई कामना नहीं है. मुझे उन पर दया उगती है, जो विरोधी दल में बैठने का सम्मान छोड़कर कुर्सी की कामना से लालायित होकर सरकारी पार्टी का पन्तु पकड़ने के लिए लालायित हैं.

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